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20 वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक की कार्यवाही


दिनांक - 29.11.2016


स्थान - प्रशिक्षण हॉल, कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्रा.वि. संगरिया


बैठक में निम्नलिखित सम्मानित सदस्यों ने भाग लियाः-
1 डॉ. एस. के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राज.)
2 डॉ. सुरेन्द्र सहारण, प्राचार्य, प्राचार्य, ग्रामोत्थान विद्यापीठ शिक्षा महाविद्यालय, संगरिया व अधिष्ठाता, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर (राज.)
3 डॉ. पी. एल. नेहरा, निदेशक प्रसार शिक्षा, स्वामी केशवान्नद राजस्थान कृषि विश्वविधालय, बीकानेर (राज.)
4 डॉ. बी.एस. यादव, क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर (राज.)
5 डॉ. के. आर. मोटसरा, प्राचार्य, ग्रा. वि. गृह विज्ञान महिला महाविद्यालय, संगरिया (राज.)
6 डॉ. सुभाष गोदारा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, हनुमानगढ़ (राज.)
7 डॉ हनुमानाराम, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, श्रीगंगानगर (राज.)
8 डॉ. अरुण गुप्ता, परियोजना अधिकारी, गंगमूल डेयरी, हनुमानगढ़ (राज.)
9 श्री संजय मानधाता, नाबार्ड, हनुमानगढ (राज.)
10 श्री अक्षय घिटांला, कृषि विज्ञान केन्द्र नोहर (राज.)
11 श्री सोहन लाल कस्वां, सहायक निदेशक, कृषि हनुमानगढ़ (राज.)
12 श्री कमलेश गोस्वामी, लेखाकार ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया
13 श्री ओम प्रकाश मांझू, संरक्षक, हमारा कुदरती खेती खेती, संस्थान, हनुमानगढ़
14 श्री ओ. पी. सैन, सहायक निदेशक (उद्यान) हनुमानगढ़ (राज.)
15 श्री सतीश चन्द्रा, एलडीएम, एसबीबीजे, हनुमानगढ़ (राज.)
16 श्रीमति राजविन्द्र कौर, कृषक महिला, संगरिया
17 प्रो. दर्शन सिंह, प्राचार्य, एस. के. महाविद्यालय, संगरिया
18 श्रीमति गायत्री देवी, महिला कृषक, तलवाड़ा झील
19 श्रीमति माया चौधरी, कृषक महिला, संगरिया
20 श्री कालू सिंह राठौड़, किसान, तलवाड़ा झील
21 श्रीमति सुरेन्द्र कौर, महिला कृषक, संगरिया
22 श्री विजयपाल, कृषक, अराईयांवाली
23 श्री सुखपाल सिंह, किसान, इन्द्रगढ़
24 श्री हरदीप सिंह, किसान, अमरसिंह वाला
25 श्री चड़ सिंह, किसान, अमरसिंह वाला
26 श्री गुरप्यार सिंह, किसान जण्डवाला सिक्खान
27 श्री नरेन्द्र विश्नोई, कृषक, संगरिया
28 श्री सेलेन्द्र सिंह, कृषक, जण्डवाला सिक्खान
29 श्री अरविन्द धारणिया, कृषक, संगरिया
30 डा. अनूप कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक व विभागााध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
31 डा. चन्द्रशेखर शर्मा, विषय विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
32 श्री उमेश कुमार, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
33 श्री महावीर प्रसाद कस्वां, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
34 श्रीमति संतोष झाझडिया, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
35 डॉ. मुकेश कुमार, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
36 डॉ. कुलदीप सिंह, विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
37 श्री आनन्द प्रकाश सिंह, कार्यक्रम सहायक कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
38 श्री रविन्द्र कुमार, कार्यक्रम सहायक कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
39 श्री रघुवीर सिंह नैन, कार्यक्रम सहायक, कृषि विज्ञान केन्द्र, संगरिया (राज.)
वैज्ञानिक सलाहकार समिति (ैबपमदजपपिब ।कअपेवतल ब्वउउपजजमम) बैठक की कार्यवाही ग्रामोत्थान विधापीठ प्रबन्धन समिति, संगरिया के प्रतिनिधि डॉ. सुरेन्द्र सहारण, प्राचार्य, ग्रा. वि. शिक्षा महाविद्यालय, संगरिया व अधिष्ठाता, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर की अध्यक्षता में प्रारम्भ हुयी। मुख्य अतिथि डॉ. सुशील कुमार सिंह, भाकृअनुप-कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. पी. एल. नेहरा, निदेशक प्रसार शिक्षा, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, डॉ. बी. एस. यादव, क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर, डॉ. सुभाष गोदारा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, हनुमानगढ़ थे। बैठक की कार्यवाही परम श्रद्धेय शिक्षा संत स्वामी केशवानन्द जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलन व पुष्प अर्पण के साथ हुई। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व विभागााध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार ने बैठक में आये सभी सम्मानित सदस्यों का कृषि विज्ञान केन्द्र परिवार की तरफ से स्वागत व अभिनन्दन किया। डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा ने वर्तमान बैठक का एजेण्ड़ा रखा तथा गत 19वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की कार्यवाही रिपोर्ट तथा कार्य योजना पढ़ी। डॉ. अनूप कुमार ने वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (2016-17) तथा वार्षिक कार्य योजना (2017-18) प्रस्तुत की। तत्पश्चात बैठक में उपस्थित अन्य सदस्यों से सुझाव मांगे। निदेशक, अटारी डॉ. एस. के. सिंह ने सुझाव दिया कि प्रशिक्षणों की संख्या कम करें तथा छममक इंेम प्रशिक्षणों का ही आयोजन करें। ग्रामीण युवाओं के प्रशिक्षण आवश्यकतानुसार 1 से 6 माह तक के हों। प्रशिक्षण में प्रतिभागी 10-15 हों। किसी भी परिस्थिति में 20 से अधिक न हो। क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिये हैचरी मैनेजर तैयार करें तथा हैचरी की स्थापना करवायें, स्वयं थ्पेी ेममक तैयार कर किसानों को उपलब्ध करायें। ‘‘मेरा गांव मेरा गौरव’’ कार्य उन वैज्ञानिकों का है जिनका गाँवों व किसानों से सीधा सम्पर्क कम होता है। कृषि विज्ञान केन्द्र इन गांवों को गोद लेकर कर वहाँ सघन कृषि प्रसार कार्यक्रम चलावें। कृषक महिलाओं के प्दअवसअमउमदज को पता करें। च्त्। करें तथा छममक इंेम तैयार करें। महिलाओं को आगे लायें तथा ज्तंपदमते के रुप में विकसित करें। अचार पर व्थ्ज् लगाने की बजाय प्रदर्शन लगावें। गाँव का सामाजिक मानचित्र किसानों की भागीदारी से तैयार करें। कृषक क्लबों को आगे लाकर कार्य करें व गाँवो का ठंेम सपदम तैयार करंे। क्षेत्र की समन्वित कृषि प्रणाली ;प्दजमहतमजमक थ्ंतउपदह ैलेजमउद्ध को पहँचाने व लोगांे को बतायें। इस हेतु केन्द्र पर एक इकाई स्थापित करंे। समन्वित कृषि प्रणाली पर व्थ्ज् लगाने की आवश्यकता नहीं है। क्षेत्र में जैविक खेती के लिये ब्वउउवकपजल की पहचान कर किसानों को बतायें। सब्जियांे पर कम काम हो रहा है। सब्जियों पर काम बढ़ाया जाये। खरीफ व रबी की सब्जियों पर अलग अलग व्थ्ज् तथा थ्स्क् लगाये जावें। व्थ्ज् लगाते समय ज्1 कृषक पद्धति, ज्2 संस्तुत पद्धति तथा ज्3 संशोधित पद्धति का ही क्रम रखा जावे। लहसुन व प्याज पर कार्य करने की जरूरत है। रिवोल्विंग फड़ को बढ़ाने का प्रयास किया जावे। डा. बी. एस. यादव ने कृषि विज्ञान केन्द्र के कार्यों की प्रसंसा की तथा कुछ सुझाव भी दिये। व्थ्ज् लगाने के लिये ळंच को पहचानें तथा उसी के अनुसारे संशोधित तकनीकी का प्रयोग करें। फूलगोभी की व्थ्ज् को ड्रिप के साथ लिया जावें। मिर्च पर लगाने वाली व्थ्ज् को फरवरी में न लगाकर इसे दिसम्बर में लगावें। किचन गार्डनिंग में हर सब्जी का अनुपात निश्चित करें। तथा सब्जी व फलों का साल भर का चार्ट तैयार करंे। डॉ. पी. एल. नेहरा ने सुझाव दिया कि बीटी नरमा में पकाव पर आने ठसंेजपदह ;साठ मारनाद्ध की समस्या पर अनुसंधान की जरूरत है। सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिये व्थ्ज् व प्रदर्शन आयोजित कर किसानों को तकनीकी से अवगत करावें। अधिक क्षेत्रों में बोये जाने वाली फसलों पर कार्य करने की जरूरत है। सरसों में तना गलन के लिये विरलीकरण तथा उचित अन्तरण की सलाह किसानों को दें। भूमिगत जल अच्छा नहीं है। किसानों को जल बचत तथा अच्छे जल से सिंचाई करने की सलाह दंे। कपास में ड्रिप पर काफी अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। अतः किसानों को इसकी जानकारी दंे। गोभी को सफेद बनाने के लिये अत्याधिक हानिकारक रसायनों का उपयोग होता है। कम हानिकारक तकनीकी का अनुसंधान करंे।

सादुलशहर में टिण्डा व कालूआना में गाजर की खेती की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। अपने क्षेत्र के लोगों को यह जानकारी देकर ऐसे कार्यों के लिये प्ररित किया जावें। आजकल डार्क्टस बच्चे में आयरन व जिन्क की कमी बताते हैं। गृह वैज्ञानिक इस पर कार्य करंे। डॉ. सुभाष गोदारा ने बताया कि भैसों में च्ब्स् ;च्मतेपेजंदज ब्वतचवने सनजपनउद्ध की काफी समस्या है। इसके मुख्य कारणों का पता लगाकर इस पर कार्य करने की जरूरत है। इसके लिये उदयपुर कृषि विज्ञान केन्द्र पर चलाये जा रहे प्रशिक्षण को ।जजमदक करें। साथ ही क्षेत्र में बांझपन की समस्या पर कार्य करें। इसके लिये किसी एक गाँव के 50 पशुओं का चयन करें। पशुपालन विभाग आपको पशु चिकित्सक व दवायंे भी उपलब्ध करवायेगा। बकरी पालन एक नया व्यवसाय है। फसलों के खराब होने की स्थिति में पशुपालन एक सक्षम विकल्प है। कम लागत पर 10 बकरियो की एक इकाई कृषि विज्ञान केन्द्र पर लगावें और इसकी आर्थिकी तैयार करें। इसके लिये सिरोही नस्ल की बकरी का चुनाव करें। पशुपालक श्री सुखपाल सिंह ने कहा कि पिछली ै।ब् डममजपदह में पशु बीमा करने की बात हुई थी। लेकिन पशु बीमा प्रारम्भ नहीं हुआ। इस पर डा. सुभाष गोदारा ने कहा कि पशु बीमा शुरू हो चुका है जो पशु की मृत्यु पर ही मिलेगा। इसकी पूर्ण जानकारी पशुपालन विभाग से ली जा सकती है। श्री ओम प्रकाश मांझू ने कृषि विज्ञान केन्द्र के कार्याें की सराहना की तथा जैविक खेती व कुदरती खेती को प्रोत्साहन देने की बात कही।

अन्त में कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र सहारण ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा अपने अमूल्य सुझाव व समय देने के लिये आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक व विभागाध्यक्ष